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जनपक्षधरता के कालजयी कवि रमेश रंजक : समीक्षात्मक आलेख ~~ ईश्वर दयाल गोस्वामी

स्मृति-शेष नवगीतकार रमेश रंजक जी के चौदह श्रेष्ठ नवगीतों का चयन, जीवन परिचय सामग्री सहयोग आदरणीय रामकिशोर दाहिया, रमेश रंजक जी के तीसरे नवगीत संग्रह 'हरापन नहीं टूटेगा' की भूमिका सामग्री अनिल जनविजय जी द्वारा एवं वागर्थ समूह में प्रकाशन प्रस्तुति के लिए मनोज जैन 'मधुर' जी, अनामिका सिंह जी को कोटिशः बधाई। रंजक जी का पहला ही नवगीत देखिए जो आज और भी अधिक प्रासंगिक हो चला है- "धूप ने कर्फ्यू लगाया है।" भाव व शिल्प की दृढ़ता के साथ यह कालजयी है। यहाँ तक कि जो प्रतिरोध के स्वर अभिव्यंजित होकर उभरे हैं, वे भी कालजयी हैं। दूसरे नवगीत की पंक्तियों में देखें- "उफ/कलम होते हुए/पाबन्दियों में रह रहा हूँ/कह रहा हूँ।" आत्मग्लानि भी व्यंग्यात्मक सौंदर्य बोध देती है। पूरा नवगीत चित्ताकर्षक है।भाव-शिल्प की नवीनता के लिए तीसरा नवगीत देखिए- "पसलियों के/चटकने को/व्यर्थ जाने दूँ।" क्या अद्भुत आत्मविश्वास का समर्थन है देखें- "गड़ रहा है/ज़हन में बलगम।" एकदम नये प्रतीक में प्रतिरोध को सहजता से कहने का ढंग ही अलग है। चौथे नवगीत में देखें- पाँव जो/आगे बढ़ाता ...